Thursday, December 11, 2008

वोट की ताकत


…पर पप्पू वोट नही देता … कोई टीवी पर बोल रहा था । सुनकर मैं सोचने लगा, आखिर पप्पू वोट क्यों नही देता? पप्पू को वोट देना चाहिए। पप्पू अगर वोट नही देगा तो फ़िर वोट का करेगा क्या? अपनी वोट से तो पप्पू अपने परिवार के लिए दो वक़्त की रोटी का भी जुगाड़ नही कर पायेगा। इतने सालों से वोट देता आ रहा है , अब तक उसकी रोटी की समस्या सुलझी क्या? तो फ़िर वो वोट देता क्यों नही है? उसे वोट चाहिए। उसे वोट देना ही पड़ेगा। क्योंकि उसके वोट पर तो इस मजबूर और बेबस देश की डूबती नैया को उबरने का दम भरने वाले इन बेशर्म , ढोंगी और निर्लज्ज खेवनहार नेताओं का जन्मसिद्ध अधिकार है।

देखा नही मुंबई की खौफनाक और वीभत्स घटना को किस आसानी से सामान्य तरीके से जीया इन बेशर्मों ने। कैसे देश और आमजन की भावनाओं से बे परवाह रहे ये वोट के लालची। पहली बात तो ऐसी दर्दनाक घटनाओं को रोक पाने में ही नाकामयाब रहे, उसपर कितने संवेदनहीन और निर्लज्जतापूर्ण बयानों से लोगों की भावनाओं को चोट पहुंचाई! कैसे देश की अस्मत और अखंडता को बचने के लिए अपने जीवन का आत्मोत्सर्ग करने वाले बलिदानियों की गरिमा को तार - तार कर दिया इन्होने। मानवीय संवेदनायें तो छू भी नही गई इन्हें। ये सब पप्पू की वोट का ही तो कमाल है। यही पुनरावृति फ़िर से हो इसलिए पप्पू को वोट देना चाहिए। हम पप्पुओं के इस वोट के दम पर ही तो ये सत्ता के भूखे भेड़िये सदियों से शांतिदूत के रूप में दुनिया के अगुआ रहे इस देश को पतन के गर्त में धकेलने में कामयाब होंगे।

तो क्या ये सब यूँ ही चलता रहेगा ? विचारने का यही सही वक़्त है , जबकि हम अपनी इस संवैधानिक शक्ति से अपने देश में फ़िर से एक नए मत के साथ अमन और चैन वापिस ला सकेंगे । सोचो …।





3 comments:

  1. Ahmed Ali from GujratDecember 11, 2008 at 2:08 PM

    nice... I like it... lovely thoughts... I agree with you that this is the right time to pull off our lazy and 'poor' politicians from the power to save our country and to save Indian civilization for which our country is known ...... nice ...

    ReplyDelete
  2. पप्पू को सोच विचार के वोट देना चाहिये!!

    ReplyDelete
  3. यार यह राज नीति बड़ी गन्दी चीज है ,कि हमने आप ने सिर्फ़ स्यापा कर कर इसे ऐसा बना दिया ?ऐसा करते हैं इंग्लैंड अमेरिका ,फ्रांस ,कॅनॅडा को पत्र लिख कर उनसे अनुरोध करते हैं कि या तो हामारे देश कि राजनीत को सुधारने के लिए कुछ विशेषज्ञ राजनीतिज्ञ भेजें क्यों कि यहाँ के लोग आज कल स्यापा विशेषज्ञ हो गये श्री प्रदीप जैसे नौजवान राजस्थान के "रुदालियों " के मध्य जा कर "स्यापा "विशेषज्ञ बनने पर ट्रेनिंग ले रहे है ]आगे कोई आएगा नही ,बस स्यापा ही करते रहेगें ]ख़ुद सुधरो जग सुधरेगा ;तुम बदलो जग बदलेगा

    ReplyDelete